वाक्य शुद्धि SSC GD Hindi Grammar

वाक्य शुद्धि SSC GD: समान अर्थ वाले दो शब्दों या विपरीत अर्थ वाले शब्दों के एक साथ प्रयोग होने तथा एक ही शब्द की पुनरावृत्ति पर वाक्य अशुद्ध हो जाता है। अतः किसी एक अनावश्यक शब्द को हटाकर वाक्य शुद्ध बनाया जा सकता है। इनमें दोनों शब्दों में से किसी एक को हटाकर वाक्य की शुद्धि को बनाया जा सकता है, उसे ही वाक्य शुद्धि कहते है।

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वाक्य शुद्धि

वाक्य शुद्धि के महत्त्वपूर्ण नियम।

1. हिन्दी भाषा में विभक्ति चिह्न केवल सर्वनाम को शेष सभी शब्दों से अलग रखे जाते हैं।

जैसे- कौशिन्दर को पेन दे दो।

2. यदि सर्वनाम के साथ विभक्ति चिह्न का प्रयोग हो तो उसे सर्वनाम में मिलाकर लिखा जाना चाहिए।

जैसे- मुझसे, हमने, उसने, तुमसे, हमको, उसको, किसको, किसने आदि ।

3. सर्वनाम के साथ दो विभक्ति चिह्नों का प्रयोग होन पर पहला विभक्ति चिह्न सर्वनाम में मिलाकर रखा जायेगा ।

जैसे- आपमें से, हममें से आदि ।

4. संयुक्त क्रियाओं में सभी अंगभूत क्रियाओं को अलग लिखा जाना चाहिए।

जैसे- खा सकते हो, वह जगह वहाँ पड़ा करती है।

5. पूर्वकालिक प्रत्यय में कर को क्रिया से मिलाकर लिखा जाता है।

जैसे खाकर, उठकर, सोकर आदि ।

6. द्वंद्व समास में पदों के बीच योजक चिह्न (-) लगाया जाना चाहिए।

जैसे- माता-पिता, रात-दिन आदि ।

7. जब वर्णमाला के किसी भी पाँचवें अक्षर के बाद उसी वर्णमाला के प्रथम चार वर्णों में से कोई भी वर्ण हो तो पंचम वर्ण के स्थान पर अनुस्वार का प्रयोग होता है।

जैसे- गंगा, ठंड आदि।

1 ] संज्ञा संबंधी अशुद्धियां

कई बार संज्ञा पद का उल्लेख करके उसका पुन: अनावश्यक पद के रूप में उल्लेख हो जाने से वाक्य बोझिल हो जाता है और उसकी प्रभावोत्पा- दकता में कमी आ जाती है।

संज्ञा-संबंधी अशुद्धियाँ :

1. कृषि हमारी व्यवस्था की रीढ़ है।

  • कृषि हमारी व्यवस्था का आधार है।

2. पतिव्रता नारी को छूने का उत्साह कौन करेगा|

  • पतिव्रता नारी को छूने का साहस कौन करेगा|

3. गोलियों की बाढ़

  • गोलियों की बौछार

4. तुम अपनी प्रतिज्ञा के शब्दों पर ध्यान दो।

तुम अपनी प्रतिज्ञा पर ध्यान दो।

5. हिन्दी के प्रचार में आज भी बड़ेबड़े संकट हैं।

  • हिन्दी के प्रचार में आज भी डीबडी बाधाएँ हैं।

5. उसकी भाषा देवनागरी है।

  • उसकी लिपि देवनागरी है।

7. इस प्रश्न का समाधान मुझे मिल गया ।

  • इस प्रश्न का उत्तर मुझे मिल गया।

8. हिंदी के प्रचार में आज भी बड़े बड़े संकट हैं

  • हिंदी के प्रचार में आज भी बड़ी बड़ी बाधाएं हैं

9. दादाजी प्रातःकाल के समय नित्य घूमने जाते|

  • दादाजी प्रात:काल नित्य घूमने जाते हैं।

10. तुम अपनी प्रतिज्ञा के शब्दों पर ध्यान दो।

  • तुम अपनी प्रतिज्ञा पर ध्यान दो।
i) लिंग संबंधी अशुद्धियां

वाक्य में प्रयुक्त शब्द के अनुसार उचित लिंग का प्रयोग न होने से भी वाक्य अशुद्ध हो जाता है ।

लिंग संबंधी अशुद्धियां:

1. परीक्षा की प्रणाली बदलना चाहिए।

  • परीक्षा की प्रणाली बदलनी चाहिए।

2. स्त्रियों धैर्यवान होती हैं।

  • स्त्रियों धैर्यवती होती हैं।

3. हिन्दी की शिक्षा अनिवार्य कर दिया गयाI

  • हिन्दी की शिक्षा अनिवार्य कर दी गयीI

4. मीराबाई एक विद्वान कवयित्री थी।

  • मीराबाई एक विदुषी कवयित्री थी।

5. मुझे मजा आती है।

  • मुझे मजा आता है।

6. दीपक के लौ जगमग उठी।

  • दीपक की लौ जगमगा उठी।

7. देश की सम्मान की रक्षा करो।

  • देश के सम्मान की रक्षा करो।

8. परीक्षा की प्रणाली बदलना चाहिए।

  • परीक्षा की प्रणाली बदलनी चाहिए।

9. ‘भगवद्गीता’ हमारी भक्ति ग्रंथ है।

  • ‘भगवद्गीता’ हमारा भक्ति ग्रंथ है ।

10. झांसी की रानी वीर थी।

  • झांसी की रानी वीरांगना थी।
ii] वचन संबंधी अशुद्धियां

हिंदी में कुछ शब्द का हमेशा बहुवचन में प्रयोग किया जाता हैं। अत: उनका उचित बोध न होने के कारण तथा कर्ता एवं कर्म के वचन के अनुसार क्रिया प्रयुक्त न होने पर भी वाक्य अशुद्ध हो जाता है।

वचन संबंधी अशुद्धियां:

1. सबों ने यह राय दी।

  • सब ने यह राय दी।

2. अब आप खेलो

  • अब आप खेलिए

3. ऐसी एकाध बातें सुनकर दुःख होता है|

  • ऐसी एकाध बात सुनकर दुःख होता है|

4. भवन को आगों ने घेर लिए

  • भवन को आग ने घेर लिया

5. ये विविध विषय से परिचित है।

  • ये विविध विषयों से परिचित है।

6. यह मेरे काम है।

  • यह मेरा काम है।

7. प्रजा ने राजा की जय जयकार कर दिया

  • प्रजा ने राजा की जय जयकार की

8. अभी तो सिर्फ ढाई बजा है।

  • अभी तो सिर्फ ढाई बजे है।

9. लेखकगण सभा में आया है।

  • लेखकगण सभा में आए हैं ।

10. विधि का नियम बड़ा कठोर होता है।

  • विधि के नियम बड़े कठोर होते है।
iii ] कारक संबंधी अशुद्धियां

वाक्य में प्रयुक्त कारक के अनुसार उचित विभक्ति या परसर्ग न लगने से, अनावश्यक विभक्ति या परसर्ग लगने से भी वाक्य अशुद्ध हो जाता है ।

कारक संबंधी अशुद्धियां:

1. मैंने यह कार्य नहीं करना।

  • मुझे यह कार्य नहीं करना।

2.मैंने नहीं जाना|

  • मुझे नहीं जाना|

3. गुरुजी के ऊपर श्रद्धा रखें।  

  • गुरुजी के प्रति श्रद्धा रखें।

4. जनता के अन्दर असंतोष फैल गया।

  • जनता में अन्दर असंतोष फैल गया।

5. देशभक्त बड़ी-बड़ी यातनाओं को सहते है।

  • देशभक्त बड़ी-बड़ी यातनाएँ सहते हैं।

6. पेड़ पत्ते गिर रहे हैं।

  • पेड़ से पत्ते गिर रहे हैं ।

7. मैंने राम को पूछा।

  • मैंने राम से पूछा।

8. मेरे नए पते से चिट्ठियां भेजनाI

  • मेरे नए पते पर चिट्ठियां भेजनाI

9. गीता ने उपन्यास को पढ़ा।

  • गीता ने उपन्यास पढ़ा।

10. कृष्ण जी ने कंस मारा।

  • कृष्ण जी ने कंस को मारा।

2 ] सर्वनाम संबंधी अशुद्धियां

सर्वनाम के सही रूप में प्रयोग न होने से भी वाक्य अशुद्ध हो जाता है।

सर्वनाम संबंधी अशुद्धियां:

1. यह वही छात्र है, उसको प्रधानमंत्री ने पुरस्कृत किया है।

  • यह वही छात्र हैं, जिसको प्रधानमंत्री ने पुरस्कृत किया है।

2. मैंने तेरे को कितना समझाया ?

  • मैंने तुझे कितना समझाया ?

3. यह हमारी क्लास है।

  • यह अपनी क्लास है।

4. तुमके कितने भाई हैं?

  • तम्हारे कितने भाई हैं?

5. मेरे से मत पूछो।

  • मुझसे मत पूछो।

6. मैंने शहर जाना है।

  • मुझे शहर जाना है।

7. तेरे को अब जाना चाहिए।

  • तुझे अब जाना चाहिए।

8. जो सोवेगा वह खोबेगा।

  • जो सोवेगा सो खोबेगा।

9. जैसा बोओगे, उसी प्रकार काटोगे।

  • जैसा बोओगे, वैसा ही काटोगे।

10. वह सब भले लोग है।

  • वे सब भले लोग है।

3 ] विशेषण संबंधी अशुद्धियां

विशेषणों का अनावश्यक, अनुपयुक्त अथवा अनियमित प्रयोग करने से वाक्य में अनेक अशुद्धियां आ जाती है, जिनका निराकरण करना आवश्यक है।

विशेषण संबंधी अशुद्धियां:

1. मुझे बड़ी भूख लगी है।

  • मुझे बहुत भूख लगी है।

2. प्रत्येक बच्चे को तीनतीन आम दीजिए।

  • प्रत्येक बच्चे को तीन आम दीजिए ।

3. दूध का अभाव चिन्तनीय है।

  • दूध का अभाव चिन्ताजनक है।

4. हमारा वाला विद्यालय सबसे अच्छा है।

  • हमारा विद्यालय सबसे अच्छा है।

5. उसे भारी प्यास लगी है।

  • उसे बहुत प्यास लगी है।

6. राजेश अग्रिम बुधवार को आएगा।

  • राजेश आगामी बुधवार को आएगा।

7. यह प्रश्न बड़ा कठिन है।

  • यह प्रश्न बहुत कठिन है।

8. इस वीरान जीवन में।

  • इस नीरस जीवन में।

9. एक संतरों की टोकरी ले आओ।

  • संतरों की टोकरी ले आओ।

3. अब महंगाई भारी मात्रा में बढ़ रही है।

  • अब महंगाई बहुत बढ़ गई है।
4] क्रिया संबंधी अशुद्धियां

वाक्य में उचित क्रिया रूप प्रयुक्त न होने पर भी वाक्य अशुद्ध हो जाता है। वाक्य में ‘अन्वय’ का होना परम आवश्यक है। अन्वय का तात्पर्य है-

कर्ता और क्रिया तथा कर्म और क्रिया का पारस्परिक समन्वय । किन स्थितियों में कर्ता के अनुरूप क्रिया होगी और किन स्थितियों में क्रिया कर्म के अनुरूप होगी इसका ध्यान रखा जाना चाहिए।

क्रिया संबंधी अशुद्धियां:

1. वह क्या करना माँगता है?

  • वह क्या करना चाहता है?

2. छोटी उम्र शिक्षा लेने के लिए है।

  • छोटी उम्र शिक्षा पाने के लिए है।

3. राम ने गुरूजी से प्रश्न पूछा

  • राम ने गुरूजी से प्रश्न किया

4. उसने मुझे गाली निकाली

  • उसने मुझे गाली दी

5. वह क्या करना माँगता है?   

  • वह क्या करना चाहता है?

6. गत रविवार वह जोधपुर जाएगा|

  • गत रविवार वह जोधपुर गया

7. पगड़ी ओढ़कर आओ।

  • पगड़ी बाँधकर आओ।

8. उसने मुझे गाली निकाली।   

  • उसने मुझे गाली दी

9. हमें यह सावधानी लेनी होगी।

  • हमें यह सावधानी बरतनी होगी।

10. अपना हस्ताक्षर लगा दो|

  • अपना हस्ताक्षर कर दो|
5] पदक्रम संबंधी अशुद्धियां

वाक्य के आशय को स्पष्ट करने हेतु प्रत्येक पद को यथास्थान रखना ही ‘पदक्रम ‘कहलाता है। वाक्य रचना करते समय यदि पदों को उचित स्थान पर प्रयुक्त न किया जाए तो वाक्य में अशुद्धि रहती है।

पदक्रमसंबंधी अशुद्धियाँ :

1. वातानीपूर्वक यह काम कर लिया।

  • आसानी से यह काम कर लिया।

२. भीड़ में चार पटना के व्यक्ति भी थे।

  • भीड़ में पटना के चार व्यक्ति भी थे।

3. एकमात्र दो उपाय है।

  • केवल दो उपाय है।

4. छात्रों ने मुख्य अतिथि को एक फूलों की माला पहनाई।

  • छात्रों ने मुख्य अतिथि को फूलों की एक माला पहनाई।

5. कई बैंक के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।

  • बैंक के कई कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।

6. यह पत्र आपके अनुसार है।

  • यह पत्र आपके अनुरूप है।

7. आप जाएंगे क्या?

  • क्या आप जाएंगे?

8. अनन्य भक्त मीराबाई श्रीकृष्ण की थी ।

  • मीराबाई श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थीं।

9. बर्तन करने के लिए साफ नौकर को मालकिन ने कहा।

  • मालकिन ने नौकर को बर्तन साफ करने के लिए कहा।

10. दिल्ली अमित की बहन गई है।

  • अमित की बहन दिल्ली गई है।
6]  द्विरुक्ति/पुनरुक्ति-संबंधी अशुद्धियाँ

द्विरुक्ति/पुनरुक्ति-संबंधी अशुद्धियाँ :

1. दरअसल में वह बहुत काइयाँ है।

  • दरअसल/असल में वह बहुत काइयाँ है।

2. वह अभी शैशव अवस्था में है।

  • वह अभी शैशव/शिशु अवस्था में है।

3. यौवनावस्था की बुराइयों से बचो|

  • युवा अवस्था की बुराइयों से बचो|

4. मेरे मना करने के बावजूद भी वह चला गया।

  • मेरे मना करने के बावजूद/बाद भी वह चला गया।

5. प्रात:काल के समय टहलना चाहिए।

  • प्रातः काल टहलना चाहिए।

6. मुख्तसर में गोदान ग्रामीण जीवन का महाकाव्य है।

  • मुख्तसर/इस्तिसार में गोदान ग्रामीण जीवन का महाकाव्य है।

7. मध्यकालीन युग में कलाओं की बहुत उन्नति हुई।

  • मध्यकाल/मध्ययुग में कलाओं की बहुत उन्नति हुई।
7] अधिकपदत्व-संबंधी अशुद्धियाँ

अधिकपदत्व-संबंधी अशुद्धियाँ:

निम्नलिखित वाक्यों में रंगीन अक्षरों में छपे पद अनावश्यक है-

1. उसने गुप्त रहस्य प्रकट कर दिये।

2. मानव ईश्वर को सबसे उत्कृष्टतम कृति है।

3. माली जल से पौधों को सींच रहा था।

4. सीतां नित्य गीता को पढ़ती है।

8]  शब्द ज्ञान संबंधी अशुद्धियाँ

18. लाठी बढ़ा उपयोगी अस्त्र है।

  • लाठी बढ़ा उपयोगी शस्त्र है।

51. सोन नित्य दण्ड मारता है।

  • सोन नित्य दण्ड पेलता का है।

30. वह नित्य माने की कसरत करता है।

  • वह नित्य माने अभ्यास/का रिवाज करता है।

32. इस समय सीता की आयु सोलह वर्ष है|

  • इस समय सीता की उम्र/अवस्था सोलह वर्ष है|

19. चिड़िया गा रही है।

  • चिड़िया चहक रही है।

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